शुक्रवार, 7 नवंबर 2008

लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर....

हाल ही में सम्पन्न अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव ने लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर पेश की है. अमेरिका के २१९ वर्षों के इतिहास में पहली बार कोई अश्वेत नागरिक राष्ट्रपति के पद पर चुना गया है और वह भी भारी बहुमत से...

१९ वीं शताब्दी में सन १८६१ में जब अब्राहिम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने लोकतंत्र की नई और सर्वश्रेष्ठ परिभाषा दी कि "लोकतंत्र, जनता की सरकार है, जो जनता द्वारा, जनता के लिए चुनी जाती है." को इस चुनावी जीत के बाद नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी दोहराया, और शायद वे इस ध्येय वाक्य को सार्थक भी कर दें लेकिन ओबामा के समक्ष अब्राहिम लिंकन तथा फ्रेंकलिन रूजवेल्ट जैसी चुनोतियाँ सामने हैं, जैसे लिंकन से पूर्व अमेरिका में गृहयुद्ध और रूजवेल्ट से पूर्व १९३० में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी थी. वैसे ही वर्तमान में अमेरिकन व्यवस्था के साथ ही पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था भी मंदी की गिरफ्त में है. परन्तु हम आशावादी हैं और आशा करते हैं कि परिस्थितियाँ बदलेंगी और कुछ सकारात्मक अवश्य होगा साथ ही भारत के संबंधों में भी और अधिक मधुरता आयेगी.

अमेरिका में अश्वेत लोगों के लिए मार्टिन लूथर किंग ने तथा भारत व अफ्रीका में महात्मा गांधी ने नस्ल भेद, रंग भेद के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किए जिसका सकारात्मक परिणाम आज पूरे विश्व के सामने "बराक ओबामा" के रूप में है और वह भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में.

यही है सच्चे लोकतंत्र की वास्तविक तस्वीर जो मूल रूप से जनता में निहित है, अगर जनता ठान ले तो वे किसी भी राजनैतिक परिणाम, पूर्वानुमान को बदल सकती है.

भारत के नीति नियंता भी अमेरिकन व्यवस्था का अनुकरण, भारतीय राजनीति में करें तो भारत में भी परिवर्तन की लहर आ सकती है जैसे दो दलीय चुनाव व्यवस्था और एक व्यक्ति का सिर्फ़ दो बार पद पर रहना. इससे नये लोगों को मौका मिलेगा और नये ब्रेन का रचनात्मक, सृजनात्मक और सकारात्मक उपयोग राष्ट्रहित में हो सकेगा.

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