रविवार, 30 नवंबर 2008

शुक्रिया पाटिल सा.......

देर आये दुरुस्त आये, की तर्ज़ पर सरकार ने इतनी देर बाद ही सही पर एक अच्छा निर्णय लेकर पाटिल सा. को बिदा कर दिया. लेकिन देर इतनी हो चुकी है की देश का मंज़र ही बदल गया. चारों ओर सिर्फ़ अराजकता, आतंकवाद, उग्रवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद हावी होता दिख रहा है.

आज सरकार ने जिस भी कारण से मंत्रालय में चेहरा बदला हो परन्तु सिर्फ़ चेहरे बदल जाने से परिस्थितियाँ ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं बदल जाती.
लेकिन अब सरकार को कूटनीति को ध्यान में रखते हुए कठोर कदम उठाने होंगे और जनता में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए दूरगामी निर्णय लेने होंगे.

अब सूरत नहीं, सीरत बदलनी चाहिए..
दुश्मनों के सीने अब छलनी होने ही चाहिए...

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