रविवार, 2 नवंबर 2008

ऎसी मेहनत व लगन को सलाम....(१)

कविवर दुष्यंत ने लिखा है कि - "पंखों से क्या होता है, हौंसलों से उड़ान होती है, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौंसलों में जान होती है."

इन्हीं पंक्तियों को साकार किया, मेरे मित्र लोकेश सिकरोदिया के अनुज चि. अजय (सुपुत्र स्व.श्री बाबूलालजी सिकरोदिया) ने....

अजय मूलतः वाणिज्य का विद्यार्थी है, एक दिन इन्होने आसमान में उड़ने का सपना देखा और हवाई जहाज को चलाने की सोची परन्तु पचौर जैसे छोटे से नगर में रहकर सीमित साधनों से ये सब हकीकत बना देना बड़ा मुश्किल था, अजय ने अपने सपने को साकार करने की ठानी और पचौर में रहकर ही हवाई जहाज का एक ऐसा माडल तैयार किया जो रिमोट की सहायता से आसमान में उड़ सकता है, कलाबाजियां दिखा सकता है.
अजय ने अपने सपने को साकार करने में इन्टरनेट की सहायता से देश विदेश के कई लोगों से संपर्क किया और एस माडल को बनाने में लगी कुछ सामग्री को विदेश से आयात भी किया. कई वर्षों की निरंतर मेहनत व लगन आख़िर साकार हुई और अजय का हवाई जहाज आसमान में कलाबाजियां दिखाने लगा.
ऎसी मेहनत व लगन को सलाम....

3 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ल ने कहा…

वाह बधाई!

Web Media ने कहा…

Vah Kya Baat Hai, Jid Karo Duniya Badalo ! Aapne to Abhinav Bindra Ki Yaad Dila Di. Your status, position and location can not block your way.

Vivek Gupta ने कहा…

शानदार उपलब्धि