बुधवार, 31 दिसंबर 2008

नव वर्ष २००९ के शुभागमन पर हार्दिक शुभकामनाएँ---


आने वाला प्रत्येक पल आपके जीवन में ढेरों खुशियाँ लेकर आए....
सुख-शान्ति व समृद्धि आपको व आपके परिवार को प्रगति पथ पर अग्रसर करे.....

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

ये क्रिकेट है......


क्रिकेट में कहा जाता है कि "क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, इसमे भविष्यवाणी नहीं की जा सकती" ऐसा ही कुछ हुआ, चेन्नई में सम्पन्न हुए भारत-इंग्लेंड के बीच खेले गये पहले टेस्ट मैच में...

जब टेस्ट मैच चल रहा था तब चौथे दिन पहले सत्र का खेल समाप्त होने तक कोई नहीं कह सकता था कि भारत मैच जीत सकता है ! लेकिन मैच टर्न हुआ, इंग्लेंड ने बहुत बड़ा लक्ष्य भारत के सामने रखा, लेकिन भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाडी ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत को ऐतिहासिक जीत दिला दी.

वैसे इस जीत की इबारत तो कल ही सहवाग द्वारा लिखी जा चुकी थी, आज सचिन और युवराज द्वारा पूरी कहानी लिख दी गई..

आज हर भारतीय कहेगा - "अब हुआ 'लगान' वसूल"....

सोमवार, 8 दिसंबर 2008

मध्यप्रदेश में पुनः शिवराज को "राज"......

प्रदेश के संपूर्ण चुनावी नतीजे आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट बहुमत के साथ 143 सीटों पर विजय प्राप्त की ।

प्रदेश की राजनीति में 5 वर्ष पूर्व जब उमा भारती के नेतृत्व मेंचुनाव लड़े गये तो राज्य की जनता ने कांग्रेस नेतृत्व को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा को तीन चौथाई मतों से विजयी बनाया और प्रदेश का ताज उमा भारती के सिर रखा किन्तु परिस्थितियाँ बदली और प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बाबूलाल गौर को कमान सौंपी गई लेकिन बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री रहते हुए भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ गिरने लगा । इस बीच उमा भारती पुनः लौटी और फिर से नेतृत्व परिवर्तन की बात उठने लगी, पार्टी के अंतर्विरोध के चलते अंततः शिवराजसिंह चौहान को मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया । बस यहीं से भाजपा के ग्राफ का टर्निंग प्वाइंट माना जा सकता है ।

शिवराज के जनहितेषी व विकासात्मक कार्यों ने जन–जन में भाजपा की छवि उजली कर दी और 'शिवराज' लहर पैदा कर दी । और तो और मतदान के समय मतदाता यहाँ तक कहते सुना गया कि हम तो सिर्फ 'शिवराज' को वोट दे रहें हैं और आज जब परिणाम आ गये तो निश्चित तोर पर कहा जा सकता है कि जनता ने लोकप्रिय नेता को वोट दिया और भाजपा के वर्तमान नेतृत्व में विश्वास जताकर पुनः पूर्ण बहुमत प्रदान किया ।

आज घोषित हुए चुनावी नतीजों में एक बात और सामने आई कि पाँचों प्रदेशों में एक दल को स्पष्ट बहुमत देकर मतदाताओं ने किसी एक पार्टी के प्रति विश्वास व्यक्त किया ताकि स्थिर सरकार मिल सके, साथ ही इनके द्वारा अन्य निर्दलीय या क्षेत्रीय पार्टियों के प्रत्याशियों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई ।

मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

नेताजी कुछ तो शर्म करो...

२६ नव. को जब से मुंबई में आतंकवादियों का हमला हुआ है तब से लगता है कि हमारे नेताओं की नैतिकता कहीं खो गई है, या उनकी वक्तव्य शैली को ग्रहण लग गया है.. तभी तो वे जन भावनाओं को तिलांजलि देते हुए मनमाने बयान मीडिया में दे रहे हैं...

१. प्रकाश जायसवाल (श्री हेमंत करकरे के शहीद होने पर) - "एक अधिकारी चला गया तो दूसरा आ जाएगा."
२. आर.आर.पाटिल (मुंबई में आतंकी हमले पर) - "बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी घटनाएँ होती रहती हैं."
३. मुख्तार अब्बास नकवी (मुंबई में श्रद्धांजलि पर) - "महिलाएँ लिपस्टिक और पुरूष टाई-वाई लगाते हैं और पाश्चात संस्कृति का अनुकरण करके श्रद्धांजलि देकर दिखावा कर रहे है."
४. वी.एस.अच्युतानंदन (शहीद कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन के घर जाने के बाद) - "अगर वह मेजर संदीप का घर नहीं होता तो वहां कुत्ता भी झांकने नहीं जाता."

इतना सब कहकर इन नेताओं को जन भावनाओं से खेलने का हक़ किसने दिया ?
क्या इनकी जबान पर लगाम लग सकती है ?
भगवान् कब इन्हे सदबुद्धि देगा ?
क्या इन्हे कुछ भी कहने से पहले सोचने का पाठ नहीं पढाया गया ?

अंत में बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि नेताजी कुछ तो शर्म करो.....

रविवार, 30 नवंबर 2008

शुक्रिया पाटिल सा.......

देर आये दुरुस्त आये, की तर्ज़ पर सरकार ने इतनी देर बाद ही सही पर एक अच्छा निर्णय लेकर पाटिल सा. को बिदा कर दिया. लेकिन देर इतनी हो चुकी है की देश का मंज़र ही बदल गया. चारों ओर सिर्फ़ अराजकता, आतंकवाद, उग्रवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद हावी होता दिख रहा है.

आज सरकार ने जिस भी कारण से मंत्रालय में चेहरा बदला हो परन्तु सिर्फ़ चेहरे बदल जाने से परिस्थितियाँ ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं बदल जाती.
लेकिन अब सरकार को कूटनीति को ध्यान में रखते हुए कठोर कदम उठाने होंगे और जनता में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए दूरगामी निर्णय लेने होंगे.

अब सूरत नहीं, सीरत बदलनी चाहिए..
दुश्मनों के सीने अब छलनी होने ही चाहिए...

शनिवार, 29 नवंबर 2008

किस बात का है इंतजार ?

देश की अखंडता, स्वतंत्रता और संप्रभुता पर आये दिन प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष हमले हो रहे हैं, मुंबई में चला 60 घंटे का गोरिल्ला युद्ध देखने के बाद, सबकुछ जानते हुए भी शीर्ष नेतृत्व अनदेखी कर रहा है.
आज जरूरत है सख्त निर्णय लेने की, देश की सुरक्षा की, अखण्डता बनाये रखने की.

11 सितम्बर को जब ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ तो अमेरिकन मीडिया द्वारा इसे युद्ध के रूप में प्रचारित किया गया तथा अमेरिकन सरकार ने इसकी जड़ तक जाते हुए अफगानिस्तान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक तरफा कार्यवाही करते हुए आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया.

भारत इस आतंकवाद से कई सालों से पीड़ित है, कई बार हमारी अस्मिता पर हमले किये गये परन्तु आज तक कभी कोई ठोस निर्णय इस जड़ को उखाड़ फेंकने हेतु नहीं लिया गया.

आतंकवादियों द्वारा गिन–गिन कर मंदिर, मस्जिद, गिरिजा, गुरूद्वारों पर हमले, चुन–चुन कर महानगरों में बम ब्लास्ट, भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर संसद पर अटेक या फिर अब मुंबई में नापाक इरादे, आये दिन इनकी गतिविधियाँ बढ़ती जा रही है.

इतना सब होने के बाद भी शीर्ष नेतृत्व चुप क्योंहैं ?????
क्या हमें अपनी अस्मिता, एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का अधिकार नहीं है ?????
क्या हम और कोई बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं ?????

नहीं अब बहुत हो चुका ! अब हमें इंदिरा गाँधी या अमेरिकन सरकार की तरह सख्त व कठोर निर्णय लेने होंगे और इस "गाजर घास" को जड़ से खत्म करना ही होगा । भारतीय सीमा से लगे ऐसे ठिकाने जहाँ पर ऐसे दहशतगर्दों को तैयार किया जाता है, जहाँ से ऐसी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं उन ठिकानों का नामोनिशान मिटाना ही होगा.

इस अवसर पर राष्ट्र कवि हरिओम पँवार की ये पँक्तियाँ अब भी प्रासंगिक हैं –

"बारूदी अंगारे लेकर, सीमा रेखा लाँघ चुका,
कस्मे–वादे, प्यार–वफा सब, खूँटी पर टाँग चुका,
तो तुम भी घातों का निर्णय, एक बार हो जाने दो,
एक "वार" सीमा रेखा के, आर–पार हो जाने दो..."

शुक्रवार, 7 नवंबर 2008

लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर....

हाल ही में सम्पन्न अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव ने लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर पेश की है. अमेरिका के २१९ वर्षों के इतिहास में पहली बार कोई अश्वेत नागरिक राष्ट्रपति के पद पर चुना गया है और वह भी भारी बहुमत से...

१९ वीं शताब्दी में सन १८६१ में जब अब्राहिम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने लोकतंत्र की नई और सर्वश्रेष्ठ परिभाषा दी कि "लोकतंत्र, जनता की सरकार है, जो जनता द्वारा, जनता के लिए चुनी जाती है." को इस चुनावी जीत के बाद नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी दोहराया, और शायद वे इस ध्येय वाक्य को सार्थक भी कर दें लेकिन ओबामा के समक्ष अब्राहिम लिंकन तथा फ्रेंकलिन रूजवेल्ट जैसी चुनोतियाँ सामने हैं, जैसे लिंकन से पूर्व अमेरिका में गृहयुद्ध और रूजवेल्ट से पूर्व १९३० में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी थी. वैसे ही वर्तमान में अमेरिकन व्यवस्था के साथ ही पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था भी मंदी की गिरफ्त में है. परन्तु हम आशावादी हैं और आशा करते हैं कि परिस्थितियाँ बदलेंगी और कुछ सकारात्मक अवश्य होगा साथ ही भारत के संबंधों में भी और अधिक मधुरता आयेगी.

अमेरिका में अश्वेत लोगों के लिए मार्टिन लूथर किंग ने तथा भारत व अफ्रीका में महात्मा गांधी ने नस्ल भेद, रंग भेद के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किए जिसका सकारात्मक परिणाम आज पूरे विश्व के सामने "बराक ओबामा" के रूप में है और वह भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में.

यही है सच्चे लोकतंत्र की वास्तविक तस्वीर जो मूल रूप से जनता में निहित है, अगर जनता ठान ले तो वे किसी भी राजनैतिक परिणाम, पूर्वानुमान को बदल सकती है.

भारत के नीति नियंता भी अमेरिकन व्यवस्था का अनुकरण, भारतीय राजनीति में करें तो भारत में भी परिवर्तन की लहर आ सकती है जैसे दो दलीय चुनाव व्यवस्था और एक व्यक्ति का सिर्फ़ दो बार पद पर रहना. इससे नये लोगों को मौका मिलेगा और नये ब्रेन का रचनात्मक, सृजनात्मक और सकारात्मक उपयोग राष्ट्रहित में हो सकेगा.

रविवार, 2 नवंबर 2008

ऎसी मेहनत व लगन को सलाम....(१)

कविवर दुष्यंत ने लिखा है कि - "पंखों से क्या होता है, हौंसलों से उड़ान होती है, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौंसलों में जान होती है."

इन्हीं पंक्तियों को साकार किया, मेरे मित्र लोकेश सिकरोदिया के अनुज चि. अजय (सुपुत्र स्व.श्री बाबूलालजी सिकरोदिया) ने....

अजय मूलतः वाणिज्य का विद्यार्थी है, एक दिन इन्होने आसमान में उड़ने का सपना देखा और हवाई जहाज को चलाने की सोची परन्तु पचौर जैसे छोटे से नगर में रहकर सीमित साधनों से ये सब हकीकत बना देना बड़ा मुश्किल था, अजय ने अपने सपने को साकार करने की ठानी और पचौर में रहकर ही हवाई जहाज का एक ऐसा माडल तैयार किया जो रिमोट की सहायता से आसमान में उड़ सकता है, कलाबाजियां दिखा सकता है.
अजय ने अपने सपने को साकार करने में इन्टरनेट की सहायता से देश विदेश के कई लोगों से संपर्क किया और एस माडल को बनाने में लगी कुछ सामग्री को विदेश से आयात भी किया. कई वर्षों की निरंतर मेहनत व लगन आख़िर साकार हुई और अजय का हवाई जहाज आसमान में कलाबाजियां दिखाने लगा.
ऎसी मेहनत व लगन को सलाम....

"जम्बो द ग्रेट"...... एक युग का अंत.....

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अनिल कुंबले का योगदान कभी न भुलाए जा सकने वाला है. कुंबले ने अपने १८ वर्ष के लंबे खेल जीवन में अनेकों उपलब्धियां हासिल की हैं. भारतीय क्रिकेट के महान खिलाडी कपिल देव जब दुनिया के सबसे अधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने तब उस आंकडे को छूना बड़ा असंभव सा लगता था परन्तु आज अनिल कुंबले एक ऐसी शख्सियत के रूप में क्रिकेट से अलविदा कह रहे हैं. जहाँ पर निश्चित ही उनके पीछे उनके रिकार्ड तक पहुँचने वाला दूर-दूर तक कोई भारतीय खिलाडी दिखाई नही देता.
कुंबले ने १८ वर्ष के लंबे करियर में ६१९ टेस्ट तथा ३३७ वन डे विकेट लेकर भारत में मील के पत्थर स्थापित किए हैं. साथ ही कुंबले ने पाकिस्तान के विरूद्ध फिरोजशाह कोटला मैदान पर एक पारी में १० विकेट लेने का कारनामा किया जो क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले सिर्फ़ एक बार जिम लेकर (इंग्लेंड) ने किया था. अनिल कुंबले ने देश के लिए जो अमूल्य सेवाएँ दी उनके लिए देश का प्रत्येक खेल प्रेमी उन्हें सदा याद करता रहेगा.

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2008

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं...

दीपमालाओं का झिलमिल प्रकाश आपके जीवन में ढेरों खुशियाँ लाये....

शनिवार, 25 अक्टूबर 2008

ये कैसी दीवाली...

ये कैसी दीवाली...?

मुरझाये चेहरे,
और जेबें खाली...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

छाई वैश्विक मंदी
और डूबी कमाई सारी...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

फुर्सत में लोग
और घूमे खाली-खाली...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

दीप जले-दिल जले
और जले दुनिया सारी...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

रहती थी सदा जगमग
और अब आई रात काली...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

कुछ का निकला दिवाला,
और कुछ की चली गई खुशहाली...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

कईयों की टूटी शादी,
और कईयों की रूठी घरवाली...
ये कैसी दीवाली...
ये कैसी दीवाली...

रविवार, 5 अक्टूबर 2008

दुआएँ...

आसमाँ पे जितने सितारें हैं,
उतनी ही हमारी दुआएँ हैं.
हर तारा टूट कर आपकी ख्वाहिशें पूरी करे,
दिल में बस यही तमन्ना है......